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"निम्नलिखित लेख विभिन्न विषयों पर सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रस्तुत की गई जानकारी किसी विशिष्ट क्षेत्र में पेशेवर सलाह के रूप में नहीं है। यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।"

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"इस लेख को किसी भी उत्पाद, सेवा या जानकारी के समर्थन, सिफारिश या गारंटी के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। पाठक इस ब्लॉग में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए निर्णयों और कार्यों के लिए पूरी तरह स्वयं जिम्मेदार हैं। लेख में दी गई किसी भी जानकारी या सुझाव को लागू या कार्यान्वित करते समय व्यक्तिगत निर्णय, आलोचनात्मक सोच और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का प्रयोग करना आवश्यक है।"

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प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम: महिलाओं के स्वास्थ्य में एक महत्वपूर्ण मुद्दा

महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में बदलावों के दौरान अक्सर विभिन्न समस्याएं उत्पन्न होती हैं, और प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) उनमें से एक है। पीएमएस महिलाओं के मासिक धर्म के पहले और दूसरे हफ्ते में आमतौर पर दिखाई देता है और इसके लक्षण मासिक धर्म के आरंभिक चरण में अधिकतर महिलाओं को अनुभव होते हैं। इस लेख में, हम प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम के बारे में एक व्यापक और विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे।

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम क्या है?

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) महिलाओं के मासिक धर्म के पहले और दूसरे हफ्ते में होने वाली एक समस्या है। यह एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें महिलाओं के शरीर में बदलाव होते हैं और इसके परिणामस्वरूप कई लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। ये लक्षण पीएमएस के पहले आने वाले चरण में आमतौर पर शुरू होते हैं और मासिक धर्म के आरंभिक चरण में सबसे अधिक महसूस होते हैं।

पीएमएस के लक्षण विभिन्न महिलाओं में भिन्न भिन्न हो सकते हैं, और इनमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लक्षण शामिल होते हैं। कुछ महिलाएं इसे तकलीफदेह अनुभव नहीं करती हैं, जबकि दूसरीं के लिए यह असहनीय हो सकता है। पीएमएस का इलाज और उपचार लक्षणों के प्रकार पर आधारित होता है और व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य और लक्षणों के स्तर पर निर्भर करता है।

पीएमएस के लक्षण और उपचार के बारे में अधिक जानने के लिए, आगे के अनुभागों में हम इस विषय पर गहन रूप से चर्चा करेंगे। हम देखेंगे कि इसके पीछे के कारण क्या हो सकते हैं, इसका उपचार किस प्रकार किया जा सकता है, और इसे नियंत्रित करने के लिए कौन से आहार और जीवनशैली के बदलाव आवश्यक हो सकते हैं। इसके साथ ही, हम देखेंगे कि इस समस्या के संबंध में सहायता के स्रोत क्या हैं और कैसे आप अपने आप को समर्थित कर सकते हैं।

इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से, हम आपको प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे और आपको इस समस्या के बारे में सभी प्रश्नों के संदर्भ में उत्तर देने में मदद करेंगे। चाहे आप इस समस्या के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहते हों, या यदि आप इसे अपने या किसी अन्य महिला के लिए समझना चाहते हों, यह ब्लॉग पोस्ट आपकी मदद करेगी। आइए अब हम इस रोचक और महत्वपूर्ण विषय की खोज करते हैं।

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम का परिचय

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) महिलाओं के मासिक धर्म के पहले और दूसरे हफ्ते में होने वाली एक सामान्य समस्या है। यह एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें महिलाओं के शरीर में बदलाव होते हैं और इसके परिणामस्वरूप कई लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। ये लक्षण पीएमएस के पहले आने वाले चरण में आमतौर पर शुरू होते हैं और मासिक धर्म के आरंभिक चरण में सबसे अधिक महसूस होते हैं।

पीएमएस एक सामान्य शारीरिक और मानसिक प्रक्रिया है जो हर महीने महिलाओं के शरीर में होती है। इसकी वजह से उन्हें थोड़ा सा अस्वस्थ महसूस हो सकता है, और यह बिलकुल सामान्य है। पीएमएस के दौरान, एक महिला के शरीर में अंडाशय के आसपास और हार्मोनल परिवर्तन के कारण विभिन्न बदलाव होते हैं। ये बदलाव उन्हें तकलीफदेह लक्षणों के रूप में दिखते हैं, जिनमें शारीरिक और मानसिक दोनों के लक्षण हो सकते हैं।

पीएमएस के शारीरिक लक्षणों में तनाव, थकान, सिरदर्द, पेट दर्द, स्तन में दर्द, उच्छ्रय और त्वचा की समस्याएं शामिल हो सकती हैं। इसके साथ ही, मानसिक लक्षणों में चिड़चिड़ापन, उदासी, चिंता, निराशा, रोना, अवसाद और अप्रियता शामिल हो सकती है।

पीएमएस के लक्षणों के साथ निपटने के लिए, एक महिला को अपने शरीर की चिंता करनी चाहिए और उसे अपने शारीर की देखभाल करनी चाहिए। ये सभी लक्षण सामान्य हो सकते हैं और आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इसे नियंत्रित करना महत्वपूर्ण होता है।

पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए, अपान कर्म, योग, ध्यान और अन्य प्राकृतिक उपाय बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। इसके साथ ही, आहार में पोषक तत्वों को शामिल करना और स्वस्थ जीवनशैली के पालन का भी महत्व होता है।

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प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम के बारे में अधिक जानने के लिए, अगले अनुभागों में हम पीएमएस के लक्षण और उपचार, पीएमएस और आहार के संबंध, पीएमएस और जीवनशैली, और पीएमएस में सहायता के स्रोत पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

पीएमएस का परिचय

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) महिलाओं की जीवनशैली में एक महत्वपूर्ण और सामान्य समस्या है। यह मासिक धर्म के पहले और दूसरे हफ्ते में होने वाले लक्षणों का समूह है जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से महिलाओं को प्रभावित करते हैं। पीएमएस के दौरान, महिलाओं को अक्सर थकान, तनाव, मनोवैज्ञानिक बदलाव, और अन्य लक्षणों का सामना करना पड़ता है।

पीएमएस के लक्षण महिलाओं के शरीर में हार्मोन के स्तर के बदलाव के कारण होते हैं। इस दौरान शरीर में प्रोगेस्टेरोन (एक हार्मोन) के स्तर में कमी होती है और इसके परिणामस्वरूप कई लक्षण उत्पन्न होते हैं। ये लक्षण पीएमएस के पहले आने वाले चरण में आमतौर पर शुरू होते हैं और मासिक धर्म के आरंभिक चरण में सबसे अधिक महसूस होते हैं।

पीएमएस के शारीरिक लक्षणों में थकान, बुखार, मांसपेशियों और संयंत्रों में दर्द, तनाव, पेट में वृद्धि, एकाग्रता की कमी, और वजन में बदलाव शामिल हो सकते हैं। मानसिक लक्षणों में चिंता, उदासी, अवसाद, उत्कंठा, इरेटेबिलिटी, और नींद की कमी हो सकती है। इसके अलावा, कुछ महिलाएं अन्य लक्षणों को भी अनुभव कर सकती हैं जैसे कि त्वचा में तेल की मात्रा में वृद्धि, सिरदर्द, और स्तनों में दर्द।

पीएमएस लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए कुछ आसान और सुरक्षित घरेलू उपाय मौजूद हैं। अनुभवशील और प्रभावी तरीकों में से कुछ शामिल हैं जैसे कि योगाभ्यास, प्राणायाम, ध्यान, अभ्यास, स्वस्थ आहार, और अनुभवशील आपातकालीन दवाओं का उपयोग।

पीएमएस लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए एक स्वस्थ आहार भी महत्वपूर्ण होता है। इसमें पोषक तत्वों की सही मात्रा, विटामिन, खनिज और प्रोटीन शामिल होना चाहिए। अशुद्ध खाद्य पदार्थों, कॉफीन, तेल, मिठाई, और प्रोसेस्ड फूड की मात्रा को कम करने का प्रयास करना चाहिए।

पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए ध्यान और मनोविज्ञान भी महत्वपूर्ण हैं। ध्यान के द्वारा आप अपनी मानसिक तनाव को कम कर सकते हैं और शांति प्राप्त कर सकते हैं। मनोविज्ञान के माध्यम से आप अपने विचारों और भावनाओं को समझ सकते हैं और उन्हें संतुलित रख सकते हैं।

पीएमएस के लक्षणों को संभालने के लिए विशेषज्ञों और समर्थक संगठनों की सहायता भी ली जा सकती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा, होम्योपैथी, नेचरोपैथी, और चिकित्सा पेशेवरों के पास पीएमएस से जुड़े प्रश्नों का सही सलाह लेने के लिए जा सकते हैं। इसके अलावा, पीएमएस सपोर्ट ग्रुप और आपसी समर्थन भी आपको इस समस्या के संगठनिक सहायता प्रदान कर सकते हैं।

यहां तक कि आप अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए आपसी समर्थन और आत्म-देखभाल कर सकते हैं। पीएमएस के लक्षणों के साथ निपटने के लिए आपको अपने शारीर की सुनने की क्षमता विकसित करनी चाहिए और उसे विश्राम और आराम देने का समय देना चाहिए।

पीएमएस के बारे में और अधिक जानने के लिए, अगले अनुभागों में हम पीएमएस के लक्षण और उपचार, पीएमएस और आहार, पीएमएस और जीवनशैली, और पीएमएस में सहायता के स्रोत पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

पीएमएस के लक्षण और उपचार

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) महिलाओं की जीवनशैली में एक आम समस्या है और इसके लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय मौजूद हैं। पीएमएस के लक्षण विभिन्न महिलाओं में भिन्नता दिखा सकती है, और इसलिए उपचार भी व्यक्ति के लक्षणों, स्वास्थ्य स्तर और जीवनशैली पर निर्भर करेगा।

पीएमएस के लक्षणों में से कुछ सामान्य लक्षण हैं जो बहुत सारी महिलाओं को प्रभावित करते हैं। इनमें थकान, ऊर्जा की कमी, मनसिक तनाव, चिंता, उदासी, गुस्सा, आक्रोश, अवसाद, पेट में दर्द, सिरदर्द, पेट में उफान, स्तनों में दर्द, त्वचा में परिवर्तन और अतिरिक्त पानी रेंटेशन शामिल हो सकते हैं।

इन लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए कुछ घरेलू उपाय मददगार साबित हो सकते हैं। योगासन, प्राणायाम, ध्यान, और अनुभवशील आपातकालीन दवाएं पीएमएस से जुड़े लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। योगाभ्यास करने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है और आपको शांति और सुख मिलता है। ध्यान और प्राणायाम के द्वारा आप अपने शरीर और मन को संतुलित कर सकते हैं और इससे पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

आहार में भी बदलाव करके पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। खाने की विभिन्न सामग्री में पोषक तत्वों की सही मात्रा शामिल करना चाहिए। उचित प्रोटीन, फाइबर, और विटामिन की मात्रा बढ़ाने के लिए सब्जी, फल, अंकुरित अनाज, दाल, और दूध जैसे पोषणपूर्ण आहार का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, तेजी से जाने वाले और बिना पेशाब किए जाने वाले पदार्थों की मात्रा को कम करना चाहिए और कॉफीन, मिठाई, और मांसपेशियों की मात्रा पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

अगर घरेलू उपाय से लक्षणों में कोई सुधार नहीं हो रहा है, तो आपको विशेषज्ञ के पास जाकर उपचार के बारे में सलाह लेनी चाहिए। एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, नेचुरोपैथी, या होम्योपैथी में विशेषज्ञ आपको सही उपचार बता सकते हैं जो आपके लक्षणों को कम करने में मदद करेगा।

पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए सहायता के स्रोत भी मौजूद हैं। आप चिकित्सा संगठनों, निगमों और समूहों से संपर्क करके अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ये संगठन आपको प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम से जुड़ी जानकारी, उपचार, और समर्थन प्रदान करने में मदद कर सकते हैं।

पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए आपको अपने आप को भी समर्थित करना चाहिए। अपने दिनचर्या में समय निकालकर ध्यान और मनोविज्ञान के तकनीकों का उपयोग करें। योगाभ्यास, मनोमंत्र, और ध्यान के माध्यम से आप अपने शरीर और मन को संतुलित रख सकते हैं और इससे पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

पीएमएस के बारे में और अधिक जानने के लिए, अगले अनुभागों में हम पीएमएस और आहार, पीएमएस और जीवनशैली, और पीएमएस में सहायता के स्रोत पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

पीएमएस और आहार

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) महिलाओं के शारीरिक और मानसिक तनाव को प्रभावित करता है, और अपने आहार में परिवर्तन करके पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। एक स्वस्थ आहार खाने से पीएमएस के लक्षणों में सुधार हो सकता है और आप अपने मासिक धर्म की प्रक्रिया को स्वस्थ बना सकते हैं।

पीएमएस के दौरान, महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं जो उनके भोजन पर प्रभाव डाल सकते हैं। सही आहार के साथ आप अपने शरीर को पूर्णता और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं और पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।

पीएमएस के दौरान सही आहार चुनें

पीएमएस के दौरान सही आहार चुनना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके शरीर को पूर्णता और स्वस्थ रखने में मदद करता है। यहां कुछ सुझाव हैं जो आपको पीएमएस के दौरान सही आहार चुनने में मदद करेंगे:

1. पोषक तत्वों की सही मात्रा

पोषक तत्वों की सही मात्रा आपके शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। आपको अपने आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन और खनिजों को संतुलित रूप से शामिल करना चाहिए।

  • प्रोटीन: मांस, मछली, मूंगफली, दही, और पनीर जैसे प्रोटीन स्रोतों को अपने आहार में शामिल करें। प्रोटीन मांसपेशियों का निर्माण करता है और शारीर के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
  • कार्बोहाइड्रेट्स: अनाज, दालें, सब्जियां, और फलों में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स आपको ऊर्जा प्रदान करते हैं। इन्हें स्वस्थ मात्रा में खाएं और अधिकता से बचें।
  • फाइबर: फाइबर सब्जियों, फलों, और अंकुरित अनाज में पाया जाता है। यह पाचन क्रिया को सुधारता है और मोटापे की समस्या से बचाता है।
  • विटामिन और खनिज: फल और सब्जियां आपको विटामिन और खनिजों की अच्छी मात्रा प्रदान करते हैं। इन्हें शामिल करने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होगी और आपको स्वस्थ रखेगी।

2. पीएमएस के दौरान खाने से बचें वस्तुएं

पीएमएस के दौरान, खाने से बचने चाहिए वस्तुएं जो पीएमएस के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। इन खाद्य पदार्थों की मात्रा को कम करें या उन्हें पूरी तरह से छोड़ दें:

  • कॉफीन: चाय, कॉफी, सोडा, चॉकलेट, और एनर्जी ड्रिंक्स में पाया जाने वाला कॉफीन पीएमएस के लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए इन चीजों की मात्रा को कम से कम रखें।
  • तेल: तेल और तले हुए खाद्य पदार्थों की मात्रा को कम करें। आपको स्वस्थ तेल जैसे जैतून के तेल और नारियल के तेल का उपयोग करना चाहिए।
  • मिठाई: मिठाई और शक्कर से बनी चीजें पीएमएस के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। इन्हें कम से कम खाएं या बिलकुल छोड़ दें।
  • प्रोसेस्ड फूड: चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, और ब्रेड जैसे प्रोसेस्ड फूड से दूर रहें। इनमें अधिक मात्रा में तेल, चीनी, और अन्य केमिकल्स पाए जाते हैं जो आपको मस्तिष्क संबंधी और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

3. प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम के लिए आहारी सलाह

पीएमएस के दौरान आहार में कुछ प्राकृतिक तत्वों को शामिल करने से आपको लाभ मिल सकता है। इन सलाहों को अपनाकर आप पीएमएस के लक्षणों को कम कर सकते हैं:

  • गर्म पदार्थों से बचें: गर्मी के मौसम में, अधिक गर्म और तीखे खाद्य पदार्थों की मात्रा को कम से कम करें। गर्मी में शाल्क्य और सीताफल जैसे ठंडे फलों का सेवन करें।
  • फाइबर से भरपूर आहार: फाइबर युक्त आहार खाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। फल, सब्जियां, अंकुरित अनाज, और दालें आपको प्राकृतिक रूप से फाइबर प्रदान करेंगी।
  • प्रोबायोटिक्स: दही, छाछ, और अंकुरित अनाज में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स आपके पाचन को स्वस्थ बनाए रखेंगे और पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद करेंगे।
  • ताजगी और उचित मात्रा में पानी: अधिकता से पानी पीना महत्वपूर्ण है। यह आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करेगा और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएगा।

पीएमएस के दौरान सही आहार चुनने से आपको लक्षणों का सामना करने में मदद मिलेगी और आपको स्वस्थ रखेगी। इसलिए, अपने आहार में स्वस्थ तत्वों को शामिल करें और खाद्य पदार्थों की मात्रा को संतुलित रूप से रखें।

अगर आपको अभी और जानना है पीएमएस के बारे में, तो हम अगले अनुभाग में पीएमएस के और ज्ञानवर्धक विषयों पर चर्चा करेंगे।

पीएमएस और जीवनशैली

प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) महिलाओं के जीवनशैली पर भी गहरा प्रभाव डालता है। आपकी दैनिक गतिविधियां, आहार, व्यायाम, और मानसिक स्वास्थ्य, सब पर प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

पीएमएस के दौरान व्यायाम का महत्त्व

व्यायाम का महत्त्व पीएमएस के दौरान और उससे पहले भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। व्यायाम आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है और आपको पीएमएस के लक्षणों के साथ निपटने में मदद करता है। योग, ध्यान, ताई ची, और व्यायाम जैसे विभिन्न व्यायाम प्रकारों को शामिल करने से आप अपने शरीर को स्वस्थ और स्थिर बना सकते हैं।

योगाभ्यास पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। योग के द्वारा आप शारीरिक और मानसिक तनाव को कम कर सकते हैं और शांति और सुख महसूस कर सकते हैं। योगाभ्यास से आपके शरीर में ऊर्जा प्रवाह में सुधार होता है और आपको मन की स्थिरता प्राप्त होती है।

ध्यान का अभ्यास भी पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। ध्यान करने से आप अपने मन को शांत कर सकते हैं और चिंता, उदासी और तनाव को कम कर सकते हैं। ध्यान के द्वारा आप अपनी आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं और शरीरिक और मानसिक संतुलन को सुधार सकते हैं।

ताई ची एक चीनी व्यायाम प्रणाली है जिसमें आपको शांति प्राप्त करने, शरीर को एकाग्र करने, और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए अवधारणाओं का उपयोग करते हैं। यह आपको पीएमएस के दौरान स्थिरता और शांति महसूस करने में मदद करता है।

व्यायाम के अलावा आपकी दिनचर्या में निद्रा और आदर्श तारीके से विश्राम का समय देना भी महत्वपूर्ण है। पीएमएस के दौरान, अच्छी नींद लेने से आपका शारीर आराम प्राप्त करता है और आप पीएमएस के लक्षणों के साथ निपटने में मदद करते हैं।

पीएमएस के बारे में और अधिक जानने के लिए, अगले अनुभागों में हम पीएमएस में सहायता के स्रोत और पीएमएस से निपटने के लिए ध्यान की महत्ता पर चर्चा करेंगे।

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